🐾प्यार का राही🐾…..🌻कमल भंसाली🌻

चांदनी रातों में, सितारों को निहारता हूँ
सुलगते मन को, शीतलता से नहलाता हूँ
जिंदगी, मैं अब भी प्यार को तलाशता हूँ
अब तक जो न समझा, समझना चाहता हूँ

हसरतों की बाँहों में, बेजान घर की राहों में
गुलाब के अनगनित फूल उगाना चाहता हूँ
जीवन को नहीं समझा, कोई ख़ास बात नहीं
खुद को समझ, खुदा को समझना चाहता हूँ

प्यार, क्या हैं, मेरे लिए, अब जानना जरुरी
प्यार, में, प्रार्थना है या फिर,दिल की मजबूरी
प्यार, में आत्मसुद्धि है, या फिर, मेरा स्वार्थ
प्यार, में पवित्रता है, या फिर निरर्थक बन्धन
प्यार, में सिर्फ मिलन या अधूरा सा समर्पण

समझ गया, प्यार बिन खुशबू ही महकता
प्यार अहसासों की साँसों, में ही बहता
प्यार स्वंय कभी भटकता नहीं, राह दिखाता
गलत दिशा के राही, को सही दिशा बताता

प्यार की,व्यवहारिक सौगात नहीं होती
प्यार में, अहसानों की गिनती नहीं होती
प्यार प्रार्थना है, उसमें विनती नहीं होती
प्यार सुखद, अहसासों की गतिमय पवन
जिंदगी के लिए, जिंदगी भर बहती रहती….

कमल भंसाली

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