आत्मिक बन्धन…१५, फ़रवरी, १९७६ ..एक याद “शायर” के नाम….कमल भंसाली

दोस्तों, हकीकत यही कहती है, कि जीवन सचमुच, एक सुहाना सफर ही नहीं, एक रोमांचित करने वाली जीवन यात्रा है। इस यात्रा में अनेक तरह की राहों से गुजरना पड़ता है, कई तरह के मोड़, कई तरह की चुनौतियां का सामना करना पड़ता है। हमने भी आज से उनचालीस साल पहले माता पिता के शुभ आशीष से जीवन साथी बन एक जिम्मेदारियों पूर्ण यात्रा का शुभारंभ किया। समय की गति के बदलाव के साथ, कई स्टेशनों का अवलोकन करते करते, हम आत्मिक जीवन पर्यटन स्थलों की और निरन्तर अग्रसर है, आशा है, आप सभी की शुभेच्छाओं से यह यात्रा अंत तक रोमांचक और सही लक्ष्य तक हमारे संयुक्त जीवन को ले जायेगी….
“शायर”, जीवन संगिनी की भूमिका को सशक्ति से आज भी निभा रही है, प्रभु से यही प्रार्थना है, उसे स्वस्थ और खुश रखे।
उपहार स्वरूप् प्यार और स्नेह भरी चन्द पंक्तिया जो दिल से लिखी गयी…..

कल का जीवन
मुझे, आज भी लगता सुहावना
क्योंकि, तुम आज भी जानती हों
मेरा, हर कदम का साथ निभाना

कल की ही, तो बात है
हाँ, मुझे याद है,
उन चालीस साल पहले
कि, वो शुभ सुहावनी
आज की जैसी रात
हमारी जवानी, हमारे अहसास
बन्ध गये थे, लेकर अनजाने विश्वास
उससे आज तक का सफर
हर दिन बना दिया
तुमने उत्तरोत्तर, बेहतर,बेहत्तर

जीवन संगिनी,
शुक्रगुजार हूँ, तुम्हारा
वक्त ने किया
जब भी किनारा
तुम्हीं ने दिया
अपने कन्धों का सहारा
दूर होती मंजिले
पास होने का
अहसास देती रही
जिंदगी यों ही
चलती रही
तेरी हल्की सी मुस्कान
राह बताती रहीं

आ, मिल कर
फिर, दीप जलाते
यादों के सफर
के मुसाफिर बन
गहराई से प्रेम को
आत्मा की
ज्योति बनाते
तन को मन के
पवित्र धागों से
बाँध, फिर एक बार
आत्म-मिलन
की सुहानी रात बनाते
संग रहकर
प्रार्थनामय होकर
मांगे वरदान
जन्मों जन्मों तक
तेरा, मेरा, साथ रहे
हम, जैसे भी रहे
खुश रहे, मनमीत रहे……

कमल भंसाली

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