कभी अलविदा न कहना…..

“यह कविता उन नवयुवकों और नवयुवतियो के संदर्भ में लिखी जो जीवन साथी बनकर अपने नए सम्बंधों को समझने में असर्मथ होते है, और गलत मार्ग दर्शन के कारण अपने जीवन पर एक प्रश्न खड़ा कर लेते है । वों नही जानते, क्या कर रहे, जो सम्बंध सोच समझ कर बना, वो थोड़ी सी गलतफ़हमियों और गलत चिंतन के कारण टूट गया । वो, यह भी नहीं जानते, अपने जीवन को असुरिक्षत होने का बोध दे रहे है । गुजारिस है, कविता की भावना को समझे । गलत न ले”…..

जमाना लाख रंग बदले
आ, दुआ करते तेरा मेरा
साथ कभी न बदले
तय है, जीवन पथ नहींआसान
कभी आएगी धूप
कहीं होगा, खुला आसमान
न मुझे होगा, सहने का अभिमान
न हीं, तुम समझना उड़ने में है, शान

सुबह की प्रथम किरण बन
मुझे अपनी मुस्कराहट देंना
बीती रात के सपनों को
अपना गहना समझना
एक हाथ अपना, मेरे कन्धे
पर रख कर इतना ही कहना
पावन प्रेम हम दोनों के
नयनो में सदा बसना

नन्हे फूल और कलिया
कल हमारी बगिया में, महकेंगे
जीवन की सेज पर, सितारे सजेंगे
खुशियों की चांदनी में नहायेंगे
भूल मत जाना, फूल कलियों को
संस्कार के गुलदस्ते में, सजाना
याद रखना, साथ जिंदगी भर निभाना

आ, दुआ करे, न कभी दूर हो
न ही हम कभी मजबूर हो
दूर क्षितिज की तरफ देख
वहां तक खींचते है, अपने
प्रेम मिलन की लम्बी रेख
हम अंतर्मन से न टूटने देंगे
हाँ, हम जिंदगी भर साथ रहेंगे

कभी उदासियों की शाम हों
दिल मेरा, तुम्हारे न पास हों
गमगीन क्षणों में इंतजार को
अपने बीते पलों से सजाना
मुझे याद कर जरा मुस्करा देना
कभी, तुम नाराज मुझसे हो
मेरी मुस्कराहट को, क्षमा समझ लेना
पर, कभी अलविदा न कहना…..

कमल भंसाली

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