आ मुस्करा ले जरा…

कुछ पराये ख्यालों से
नाराज न हो जिन्दगी
कुछ तुच्छ गम से
गमगीन न हो जिन्दगी
खुशियों के समुद्र में
जिन्दादिली की लहरों में
उतर कर मुस्करा, जिन्दगी
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा …..

कालधर्म को बहने दे
दुःख को भी नाचने दे
अपेक्षा में न बसा संसार
न ही अपने को धिक्कार
न ही रख मन में विकार
जो मिला कर,वही स्वीकार
ऐसा ही दे जिन्दगी को आकार
सपने सब ही होंगे साकार
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा…..

जो तेरे पास वही तेरा
दूर से ही आता सवेरा
थोड़ा सा सबसे फासला
और तेरा नायाब हौंसला
नहीं होने देगा, कभी मजबूर
न नाप किसी का कसूर
कोई नहीं होता,यहाँ पूर्णावतार
नहीं ही जग होता, किसी की जागीर
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा……

देख चमन की ओर
कितना उत्साह, कितना शोर
प्रामन्य नहीं, तेरा अवसाद
प्रकृतिकृत ही तेरा, अपना विषाद
सारगर्भित ज्ञान ही, धर्म का आधार
समुत्थान, सिद्धिदायक कर मंगलाचार
आ चल चलते प्यार के चमन में
मुस्कराहट के फूल उछाले गगन में
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा….

कमल भंसाली

आ मुस्करा ले जरा…&rdquo पर एक विचार;

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