स्वस्थ शारीरिक और आर्थिक धनवान…|

सपने सभी देखते हैं, सपने अच्छे आते है,तो शुभता महशूस होती है | किसी ज्योतिषी ने कभी नहीं कहा होगा,कब किस प्रकार का सपना देखना, शुभता का प्रतीक है | यहां, मै आपको जरुर एक सपने के बारे में कहूंगा, जो मेरे हिसाब से हम सब को देखना चाहिए ” स्वस्थ शारीरिक और आर्थिक धनवान” बनने का, “यह एक शुभ सपना” है | इसके लिये हमें किसी किताब या किसी मार्गदर्शन की जरूरत नहीं है, सिर्फ हमे यह सपना अपनी आत्मा में बसाना होगा और कुछ आदतों का निवारण कर,अपनी योजना के तहत उनमें सुधार करना होगा | ध्यान रहे, यह सिर्फ धनवान बनने का नहीं अपितु “स्वस्थ धनवान”बनने का है |

हर आदमी जब पैदा होता है तो ज्यादातर स्वस्थ ही होता, परन्तु जरूरी नहीं उसके पास अपार धन हो | कोई अगर गरीब है तो दोष नहीं, परन्तु उसका स्थिति को स्वीकार कर लेना, सही नहीं कहा जा सकता | आइये, हम उन साधनों पर विचार विमर्श करते है, जिनसे हम स्वस्थ आर्थिक धरातल पर खड़े हो सकते है |

सबसे पहले “__________”स्वस्थ काया”____★मुख्य उद्धेश्य ★

स्वस्थ शरीर, को प्रथम सर्वोतम सुख माना गया है | इसलिए पहले यह तय करना होगा की हम आर्थिक रूप से जैसे जैसे सक्षम होते रहेंगे, हम स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह नहीं होंगे | हमारे सारे आर्थिक और व्यापारिक निर्णय हमारा दिमाग करता है | दिमाग तभी सही काम करता है, जब वो तनाव ग्रस्त नहीं होता| | हम,यह तो दावे के साथ नहीं कह सकते कि सब निर्णय सही होंगे, पर जरूरी है, व्यापार मे सफलता का मापदंड एक असफलता से कभी नहीं आँका जाना चाहिए | असफलता को एक स्वस्थ शरीर और मजबूत मन ही, बिना किसी तनाव के सहन कर सकता है | ध्यान देने की बात है, हर आदमी गलती करता है, उसका नुकसान भी होता होगा, पर दुःख मनाने से कभी भी कमी की पूर्ति नहीं होती , सही दिमागी चिन्तन और आत्मिक शांति से सब कुछ संभव है |

दूसरी बात _____________★★जूनून आगे बढने का, आत्मा में बसाना★★

सबसे पहले और आगे बढने से पहले यह गौर करने की बात है कि ” जरूरी नहीं ज्यादा पैसे से ज्यादा खुशियां हासिल की जा सके” | हम भारत में रहते है, हमारे संस्कार यही कहते है की हम कर्म से ही ज्यादा सम्पत्ति हासिल करे, सही कर्म से आमदनी की रफ्तार धीमी होती है, परन्तु संतोषप्रद होती है | गलत तरीकों से कमाया धन, कभी भी मान सम्मान को खतरे में डाल सकता है |हमारी पारिवारिक जिन्दगी बहुत से ऐसे खर्चे कराती है, जिनकी उपयोगिता नहीं रहते हुए भी करने पड़ते है | कई विरोधाभ्यास के बावूजद हम आडम्बर युक्त खर्चे शादियों तथा श्राद्ध आदि में करते है | हमारे यहाँ ये खर्चे अनिवार्य श्रेणी में रखे जाते है | अगर हम अपनी मानसिक चेतना का आधुनिककरण करे तो इन सब से बच सकते है, और हमारी बचत की प्रवृति आगे बढ़ सकती है, और इसे हम समझदारी की बचत कह सकते है |यह हमारा कदम उस आधुनिकता की तरफ भी इशारा करता है, जहाँ हम झूठी शान के कारण आमोद, प्रमोद तथा फैशन पर क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करके संतोष का अनुभव करते है | सार यही,फिजूलखर्ची से बचे, आडम्बरों को न अपनाये और छोटी छोटी बचत पर ध्यान दे | वो दिन दूर नहीं जब हम इस बचत से “स्वस्थ धनवान” बन सकते है | ध्यान दे “झूठी शान के आर्थिक पतन”, से बचना जरूरी है | आगे बढना हैं तो आत्म सुधार तो करना ही पड़ेगा |

तीसरी बात_____________★★★ आज ही है, मेरे पास !★★★

हम अपने कार्य को अगर सही ढंग से संपादित करे तो बहुत बचत कर सकते है | जैसे समय पर बिजली, पानी, टैक्स, क्रेडिट कार्ड आदि का भुगतान करे, अंतिम तिथि की प्रतीक्षा न करे तो बचत को बढ़ावा न मिले,पर ह्यास नहीं होता| | ‘कर्ज का मर्ज’ को देर से किया भुगतान काफी बढ़ा सकता है | हमारी बचत योजनायें जो हमने भविष्य में समृद्ध होने के लिए ली वो भी प्रभावित होकर हमारी लापरवाही से कम समृद्ध होती है क्योंकि उनपर भी देरी का शुल्क कम्पनिया काटती है | अत: हमें अपनी टेबल को सदा साफ़ रखना चाहिए | समय समय पर निवेशित योजनाओं का मूल्यांकन और उसी अनुसार निर्णय समीक्षा जरुर करनी चाहिए | आजकल इस तरह के कई सोफ्टवेयर है, जो न केवल हमारी दर्ज की सूचनाओं को सुरक्षित रखते अपितु हमें सम्बन्धित जानकारियां दे सकते है | शेयर मार्केट के तथा अन्य जुओं से दूर रहे परन्तु उनमें तथा म्यूचल फंड में निवेश गुणवता के आधार पर जरुर कर सकते है |

चौथी बात______________★★★★संयमित खर्च★★★★

इंग्लिश में एक कहावत है, जो भारतीय कहावत के अनुरूप है, ” Money saved is money earned” हमारे बड़े बुजुर्ग सदा कहते आये, ” आदमी को पैर उतने ही फैलाने चाहिए, जितनी बड़ी चद्दर” | हर आदमी की जरूरतें कितनी
ही विशाल हो, पर आय का दायरा सीमित ही होता है | आज हर घर में मोबाइल तथा दूसरे इलेक्ट्रोनिक्स की तादाद इतनी बढ़ गई की उनका खर्चा आदमी का रोज का तनाव बढ़ा देता | उपकरणों का कम प्रयोग स्वास्थ ही नहीं हमारी
जमा पूंजी भी बढ़ाता है | हमारी खोज सदा यह ही रहनी चाहिए की सही बचत हम कितनी कर सकते है | तय है, ज्यादा खर्च हमे नाम नही देगा पर बदनाम जरुर कर देगा |

पांचवी बात____________★★★★★वक्त के साथ चलना★★★★★
आज का दौर काफी भावुक है, छोटी छोटी बातों से बहुत जल्दी प्रभावित होता है, खासकर आमदनी के साधन तथा निवेश की योजनाये पर सम्पूर्ण निगरानी नहीं रखने से काफी दिक्कते आ सकती है | उदाहरण स्वरुप कुछ सालों
पहले S.T.D के बूथ कितनी तेजी से खुले थे, मोबाईल तथा इन्टरनेट के प्रचलन के साथ धीरे धीरे लोप हो गये |
जो भी इस काम से जुड़े उन्होंने अगर विकल्प नही ढूंढा तब तक शायद ही उन्हें आर्थिक कठिनाईयों का सामना ही नहीं
तनाव भी भोगा होगा, जो हमारे संकल्प “स्वस्थ धनवान” बनने के विपरीत की दशा है | मेरा सुझाव यही है आनेवाला समय पढ़ने का तथा इलेक्ट्रोनिक साधनों का है, अविष्कार कीजिये नये कामों का | कई क्षेत्र आज भी ऐसे है, जिनकी जानकारी से हम तेजी से आगे बढ़ सकते है – इसे तनाव से नहीं ठंडे दिमाग से चिन्तन करना जरूरी है | यह चिन्तन
सर्वोत्तम नहीं रहेगा “आज भी हमारा, कल भी हमारा” !

छठी और अंतिम बात______★★★★★★सीमित आकांक्षाये विस्तृत खुशिया★★★★★★

हमारी भावना ही हमारी शक्ति तभी होगी जब उसे सही सम्मान और महत्व दें | हम अपनी छोटी छोटी असफलताओं को किसी भी सुरत में अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर आघात नहीं करने देंगे |
हम अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा जरुर बचायेंगे, परन्तु वो 5% से कम नहीं होना चाहिए.
“स्वस्थ धनवान”का मतलब कतई ये न समझे की करोड़ो की हमे जरूरत है, हमे जरूरत उतनी ही जिनसे हम अपनी जिन्दगी को सही गतिमान रख सके | बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी हमारी है, परन्तु उनका साथ जीवन में आगे मिलेगा, वर्तमान समय में शंका पूर्ण विश्वास ही होगा | हम अब जानते है, परिवार शब्द छोटा हो रहा है !
हम जब तक जिन्दा रहे तब तक आर्थिक रूप से किसी पर मोहताज नहीं रहेंगे, चाहे वो सन्तान ही क्यों न हो |
हमारा व्यवहार ओर हमारा स्वास्थ्य इस योजना की बुनियाद है, यह एक मात्र संकल्प ही तनाव से बचा सकता है |
हमारा विस्तृत ज्ञान जो हमे अध्ययन करने से मिलेगा उसे हमें, अपनी इस योजना के साथ जोड़ते रहना है
अंतिम और खरी बात ऋण से बचके रहना जरूरी है यह आर्थिक कैंसर होने की चेतावनी है |
किसी लेखिका ने कहां ” A financial genius is someone who manages to earn more than his family can spend.”..Liza
चलते चलते…..
मंगलकामनायें, शुभकामनायें
आपकी और हमारी आनेवाली दीपावली शुभ हों….. “जय माँ लक्ष्मी”

कमल भंसाली

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