आसमान के पंक्षी

आसमान में उड़ने वाले
लाख बार जमीं को भूल जाए
पर हकीकत में जब कभी गिर जाए
तो धरती की मेहरवानी याद आये
फलक में सितारों की नहीं कोई कमी
चाँद सूरज भी वहां रहते
पर प्रेम की गंगा तो धरती में ही समाये

सार जिन्दगी का इतना ही हैं समझना
आ गये हो तो जाना भी तय हैं
अभिमान के आकाश में ज्यादा नहीं उड़ना
भंगुर जीवन कों एक दिन है बिखरना
इस बिखरे पन को आखिर समझना
तो धरती पर ही होगा रहना
आसमान में उड़ने वाले….

संसार हैं सुख दुःख का विशाल समुन्द्र
मकसद बिना कुछ भी नहीं है यहां
मकसद ही जीवन तत्व
इस तत्व की खोज ही जीवन यात्रा
यह यात्रा नही है उड़ने की
इस भवसागर को विरले ही पार करते
बाकी तो आते और जाते
अस्तित्व की देह को राख में पनाह दे जाते
आसमान में उड़ने वाले…..

*****कमल भंसाली *****

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