🙇माँ की ममता 🙇✍️ कमल भंसाली

शीर्षक : माँ की ममता
रचियता: कमल भंसाली
माँ की ममता और जीवन की क्षमता
दोनों को जो समझे, वो भाग्य विधाता
माँ के उर से, रचा बसा प्यार ही, आता बाहर
सच को  समझना, माँ से ही बना सारा संसार
ममत्व के नीर से, कोई भी नहीं रहता, प्यासा
सन्तान के लिए त्याग, उसकी है, यही परिभाषा
जननी, वो तन-मन की पीड़ा सहकर कहलाती
अद्भुत है, माँ, हर देवी उस के अंदर दिख जाती
माँ, संयम की धरित्री, विस्तृत ह्रदय धारिणी होती
माता मुंह से निकल जाए, हर पीड़ा शांत हो जाती
माँ की ममता में छिपी रहती, जीवन की गहनता
सन्तान कुपूत हो सकती, माता नहीं होती कुमाता
“माँ ” शब्द दिलाशा देता, हर ठोकर में निकल जाता
उठ बेटे, चोट लगी क्या ?  कानों में मृदुलता भर जाता
रचियता: कमल भंसाली