🛑दर्पण झूठ न बोले🛑कमल भंसाली

दर्पण में देखे हर कोई लगे सबको प्यारा
हर सूरत ने दर्पण में स्वयं को ही निहारा
बदनसीब दर्पण को किसी ने नहीं समझा
पर दर्पण ने दिखाया उनका असली चेहरा

कुछ सूरते दर्पण को पहचानी सी नजर आई
पर अपनेपन की उनमें सदा कमी ही नजर आई
खामोश रहा दर्पण अपने अस्तित्व पर विश्वास रहा
उनकी उनकी कमियों को नजरअंदाज करता रहा

सजी संवरी सूरत में जब कुछ भी नहीं देखता
तो खामोशी से उनके हटने का इंतजार करता
हकीकत के हर पहलू से अजनबी बन कर रहता
किसी के अंतर में झांकने का अफसोस करता

दर्पण झूठ नहीं बोलता यथार्थ को ही तौलता
असमंजस की दृष्टि में कभी धुंधला कर रह जाता
स्वयं को सुधारने का पैगाम खामोशी से दे जाता
क्षय होती सुंदरता पर गर्व न करने का संदेश दे जाता
रचियता**कमल भंसाली

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🌴कर्मफल🌴कमल भंसाली

टूटे हुए दिल को समझाया
जब बुरे वक्त का हो साया
कोई किसी के काम न आया
बदल जाता अपनों का सरमाया

गैरों की क्या बात करना
अपनों को क्या दोष देना
हर रिश्ता का यही कहना
हर गम स्वयं का अपना

वक्त की धूप से न घबराना
छांव की तरफ ही पैर बढ़ाना
आये अगर परिश्रम से पसीना
तो संयम के रुमाल से पौंछना

न ही रुकना न ही झुकना
स्थिर हो चलते ही जाना
याद इतना ही सिर्फ रखना
मंजिल का न हो कोई बहाना

माना सपने सुहाने होते
पर भरमाने वाले होते
जिनमे कई रंग ही होते
वो कभी सच्चे नहीं होते

करना अपनी जिंदगी पर विश्वास
समझो तो कहती हमारी हर सांस
आत्म-विश्वास से करते रहे प्रयास
अद्भुत जीवन का यही है सारांश

कल की कलकल में न बहना
आज की लय में ही सीधा तैरना
सब खोया आज में ही है समाया
“कर्मफल” का पेड़ अगर सही उगाया
रचियता✍️ कमल भंसाली

🚶जीवन💃 एक सादगी पूर्ण कविता✍️कमल भंसाली

कितनी दूर का है “सफर”
जो हम इतने होते तैयार
साँसों से बंधे है प्राण
सांस रुकी तो निष्प्राण

कुछ नहीं है जीवन
सिर्फ उम्र की है दास्तां
न कोई मंजिल न कोई रास्ता
कर्म से ही इसका सिर्फ वास्ता

नियति के सुर गाता
विपति में भी मुस्कराता
हर पथ का बन राही
ये कभी रुक न पाता

कल की ताकत से ही घबराता
आज को कभी नहीं समझ पाता
कल था कल में ही अस्त हो जाता
धरातल पर उभर कर न आ पाता

अस्तित्व का खेल है जीवन
निरन्तरता की देन है जीवन
सच का मोहताज है जीवन
अधुरता से परेशान है जीवन

दावा करता जो जीवन को समझता
यकीनन वो कुछ नहीं जानता पहचानता
सजावट का शौकीन हो “पथ” भूल जाता
जीवन तो “नग्न” ही आता वैसे ही जाता

रचियता ✍️कमल भंसाली

😇अहम 😇 कमल भंसाली

गुजारिश है वक्त की
जिंदगी को मुस्कराने की वजह दीजिये
बहती हवाओं की कशमकश में
न डगमगाने दीजिये
यही है वो पल
अब और इंतजार न कीजिये
खुद भी मुस्कराईये
दूसरों की मुस्कराहटों से
सुबह से शाम तक
नये आयामों की सौगात दीजिये
गुजारिश…..

कौन है इस दुनिया के मंजर में
जो बिन गुनाह चला हो
कैफियत उस को ही दो
जो हमसफर बन चला हो
ये जिंदगी का है सफर
टेढ़ी मेढ़ी यहां हर डगर
डगमगाये अगर कोई कदम
तो संभलने का रखना स्वयं का दम
सहारे की तलाश में न रहना
यहां कोई अपना नहीं मेरे हमदम
गुजारिश….

रंगबिरंगी दुनिया में
सपनों के रंग रंगीन होते
यथार्थ के पहलू पर संगीन होते
जिनमें स्वर्णिम संकेत होते
कारवां जिंदगी का चलता रहे
ख़िलखिलाटों के फूल महकते रहे
दुनिया के दलदल में “कमल” सदा खिलते रहे
खुशदिल बनकर सदा आप “अहम” रहे
गुजारिश…..
रचियता💐कमल सिंह भंसाली

⏳मृत्यु स्पर्श⏳कमल भंसाली

मृत्यु जिंदगी के स्पर्श का है आभाष
या सच के अंतिम सूत्र का कोई प्रयास
जिंदगी नहीं तो मृत्यु नहीं
मृत्यु ही जीवन का आधार
जीवन तभी है सही साकार
🦍🦍🦍
अस्तित्व से निकास है जिंदगी का
मृत्यु ही प्रथम सारांश है जिंदगी का
बचा हिसाब है हर जन्म के कर्मफल का
🦌🦌🦌
सांसो की डोर से बंधी है काया
लिपटी ऊपरी परत है मोह माया
चमड़ी के घर को कितना ही सजाले
पर उससे पहले इसकी क्षुद्रता भांपले
🐵🐵🐵
जिसे हम कहते ये तेरा वो मेरा
वो ही तो गहन जीवन का अंधेरा
तय क्षण से अजनबी रिश्ता हमारा
सदा साथ रहेगा बन कर उजियारा
🦊🦊🦊
सही यही होगा जो मिलते क्षण
वही हमारी धरोहर वही स्वर्ण कण
बाकी की चाभी रख ले कितनी ही पास
कभी नहीं होगा हमारा बिन सांस की आस
🐏🐏🐏
आज जिन्हें हम अपना कहते
इस जन्म में श्मशान तक रहते
उससे आगे की यात्रा कर्म करते
आत्मा की मंजिल वो ही तय करते
📿📿📿
रचियता✍️ कमल भंसाली